Mountain Calling

Mountain Calling

More than two hours of commute, meetings with clients, daily submission of reports, deadlines for clearing files – all this and more ensured that life perpetually remained in the fast forward mode among all of us. The weekend respite was just not enough to recoup your exhausted yourself. And one fine day you may decide to call it quits, heading back towards the hills to start life afresh. We are exchanging a fast and fashionable lifestyle of the cities for the slow and simple life of the mountains.


The fact that people take a break from their hectic schedule and go to the hills to rejuvenate themselves speaks volumes about salubrious effects of cool climes. Even the afflicted are advised by doctors to recuperate in the hills. If possible. While life goes on at a leisurely pace in the mountains, it would be wrong to assume that it is bringing and uneventful.


Whether one takes a stroll or just sits, enjoying the bounties of nature, it relaxes the mind instantly. For those with an adventurous streak, trekking and mountaineering are exciting activities which also help in understanding the topography better. Tourism related activities are not just attracting youngsters, but also paving the way for entrepreneurs to tap into its economical potential.


Accessibility and connectivity have brought welcome changes to the remote hilly areas. The government, too, gives subsidies and soft loans, camps, hotels restaurants and home stays are generating business. If it is pollution which is making life difficult in cities, serene and peaceful life of hills are indeed calling many. Be it solo travellers or travelling in group, such trips to hills indeed give a refreshing experience and boost to ‘reverse migration‘ to the hills.


The Grand Pilgrimage- Nanda Devi Ratjat Yatra

Hailed as one of the most unique cultural and religious event of Uttarakhand, the Nanda Raj yatra begins from  Nanda nanda-devi-rat-jaatDham Nauti.

The one of its kind religious festival, Nanda Rat Jat Yatra is held once every 12 years, in the hills of Chamoli District of Uttarakhand, India.

The yatra promises to be a distinctive celebration at an amazing Himalayan height. Three elements make the journey special, both for the participants and the observers mystery, romance and faith.

This journey represents the magnificence and the ability of the state and its people. Those who have undertaken this grueling journey will known that throughout the trek people will involve themselves in the journey are welcomed and taken care of en-route by the hill folk in the spirit of Athiti Devo Bhava (Guests are Gods). And above all, the celebration is a great equalizer. It promotes universal brotherhood. People from all across the nation and abroad, flock to be part of this unique festivity.

Religious processions in Uttarakhand are known as Jats. Nanda Devi Jat is an integral part of Uttarakhandi tradition culture. The Doli of Nanda Devi is take out in a procession from Kroor Nanda Devi Temple in the Nandakini Valley, and the Jat ends in the alpine meadows situated a a height of 3354 meters. The Yatra goes through one of the most beautiful but arduous Himalayan path.

This 280 km long yatra, also known as the Himalayan Mahakumbh, takes around 20 days to complete. It is a historic spiritual journey over a difficult terrain. After the creation of the hill state of Uttarakhand, this is the first Nanda Raj Jat and hence it has a great historical significance. He said that the yatra, linked to the aspirations of the people, has a great historic and spiritual value.

According to Dr DR Purohit, a well known folklorist of the state, “This yatra originates from the Nauti village 20 km of Karnaprayag Tehsil of Chamoli district of Uttarakhand after the Kunwar of village Kansua inaugurates the ceremony. Nanda Devi Raj Jat yatra is an arduous journey (it’s a trek) and the three weeks of yatra is packed with the exposure of Garhwal Himalaya culture, ethnic lifestyle and endemic flora and fauna of the region. Majority of yatra route is along the Pindar valley. The journey absorbs the rainbow like beauty of traditions of the Himalayan society and a deep feeling of faith and reverence for Nanda Devi in Himalayan folk lore reflects the respect held for women in Uttarakhand.”

For smooth yatra. Facilities of  parking, medical care, drinking water, sanitation, safety and communication have been nanda-devi-rat-jaat2put in place at all the Paraws of the yatra route.

Food is provided by the local living people enroute, as per tradition. The route becomes tougher after Bedani, therefore only medically fit pilgrims are permitted to go.

The devout use sand bags, blocks and rope to climb at various places. The Chausigya leads the main role in the Nanda Devi Raj Jat Yatra. The sheep has four horns and the Yatra starts with this sheep from Nauti Village. People decorate the sheep with clothing’s and ornaments and when the yatra reaches its destination, the sheep is freed.

ट्रेकिंग की तैयारी

ट्रेकिंग करना एक साहसिक कार्य है और जोखिम भरा भी | दुर्गम इलाको में पैदल चलते हुए किसी एक स्थान से दूसरे स्थान तक घंटो, दिनों, सप्ताह या कुछ सप्ताह में पहुँचना ट्रेकिंग कहलाता है | ऐसी गतिविधि को करने के लिए सही योजना बनाना अति आवश्यक है | किसी ट्रेकिंग कार्यक्रम की सफलता के लिए कार्यक्रम की अवधि, अवधि तथा सदस्य संख्या के अनुसार राशन व भोजन की मात्र, ऊंचाई वाले इलाकों में खाने, पीने की कुछ चीजें, इंधन, कुली, चूल्हा, बर्तन, पूरे ट्रेक की जानकारी, प्रतेक व्यक्ति का व्यक्तिगत सामान, आवश्यक हो तो कुछ दवाइयां और अनुमानित खर्चा अहम बातें हैं | जिन पर ध्यान देना होता है | इसके अतिरिक्त क्या करें, क्या न करें की जानकारी भी जरूरी है |

प्रथम चरण:-

सबसे पहले ट्रेकिंग करने की क्षेत्र निर्धाति करके पूरे मार्ग की जानकारी इकठठा की जाती है | किस-किस दिन कितना दूर चलना होगा और कितनी चढाई चढनी होगी, इसी के अनुसार पड़ाव निर्धारित करने होते हैं | विशेष कर ज्यादा ऊंचाई वाले इलाकों में अधिक समय लगता है, यधपि लौटते समय नीचे की ओर कम समय लगता है |

दूसरा चरण:-

राशन कितना लिया जाये यह एक मुख्या मुद्दा है | लोगों की खुराक के हिसाब पर राशन ख़रीदा जाता है | दलिया बहुत पौष्टिक आहार है जिसका ट्रेकर्स ओर पर्वतारोही अक्सर प्रयोग करते हैं | वोर्नविता और कॉफी कुछ मात्र में रखना उचित है |  ट्रेकिंग कार्यक्रम का आयोजन करने वाले अपने राशन में बदलाव ला सकते हैं | थोड़े बहुत सूखे मेवे साथ रखने चाहिए | ज्यादा ऊंचाई में कुछ समय तक खाना अच्छा नहीं लगता | ऐसी स्थिति में आचार बहुत सहायक होता है, जिसे हर दल को अपने साथ जरूर रखना चाहिए |

तीसरा चरण:-

खाना बनाने के बर्तन, चूल्हा व इंधन, पानी के लिए जरीकेन, सब्जी काटने के लिए चाकू ध्यान में रखना जरूरी हैं | इंधन के नाम पर गैस या मिटटी का तेल लेकर जाना कई जगह वर्जित है |  परन्तु यदि ले ही जाना पड़े तो अत्यधिक सावधानी व प्रकृति का ध्यान हमेशा रखना चाहिए | ऐसे में ट्रेकिंग के समीप ही पहुँच कर इंधन का प्रबंध करना चाहिए | ट्रेकिंग की लोकप्रियता को देखते हुए स्थानीय लोगों ने हर प्रकार की आवश्यक वस्तु का प्रवंध करने का व्यवसाय चला दिया है| ट्रेवल एजेंसी जैसे कि पथिक वर्ल्ड भी सभी जरूरी चीजे उपलब्ध करा देती है |

चौथा चरण:-

ट्रेकिंग के दौरान कई जगह कैंप लगाने पडते हैं | सदस्यों कि संख्या को देख कर (Two man tent, 4 men, 8 men, 10 men tent) टेंट का इंतजाम करना चाहिए | दल के लीडर को हर प्रकार से चौकस रहते हुए आवश्यक दवाएं (उलटी, दस्त, चोट, बुखार, शरीर दर्द, सिर दर्द इत्यादि) रखनी चाहिए |

व्यक्तिगत सामान के तौर पर मौसमी कपड़ों के आलावा सिर से लेकर पैर तक ध्यान में रखते हुए बन्दर टोपी, चश्मा, दस्ताने, मजबूत और आराम दायक जूते जो नए न होँ, पुरानी जुराबें, पानी कि बोतल, कैमरा, टोर्च, सुईं-धागा, चिपकाने के लिए quick fix, अपनी दवाइयां, वाटर प्रूफ रक्सक, स्लीपिंग बैग, बारिश से बचने के लिए प्लास्टिक सीट, टॉफी, ग्लूकोस आदि रखना चाहिए|

ट्रेकिंग के दौरान ऊंचाई का विशेष महत्व है | विशेषज्ञों ने समुद्र तल से एवरेस्ट तक कि ऊंचाई को तीन भागों में बांटा है | समुद्र तल से दस हजार फुट तक कि ऊंचाई वाले क्षेत्र को जीवन क्षेत्र (zone of life) कहते हैं | दस से बीस हजार तक कि ऊंचाई वाले क्षेत्र को ऑक्सीजन क्षेत्र (oxygen zone) और बीस हजार से ऊपर के क्षेत्र को जीवन रहित क्षेत्र (zone of death) कहते हैं | एक अच्छे ट्रेकर को इस बात का ज्ञान होना चाहिए | ट्रेकिंग दल में यदि कोई डाक्टर हो तो अचछा रहता है |

किसी भी इलाके में पहुँच कर ट्रेकिंग शुरू करने से पहले अपने आपको एक्लिमेत्जे करना चाहिए| पहाड और बर्फ के नाम से ही कई लोग ठंड कि कल्पना करने लगते हैं | अनेक ट्रेकर अच्छे मौसम में भी बहुत कपडे पहन कर चलते हैं | परिणामतः अधिक पसीना आता है और थकन बढ़ जाती है | चलना मुश्किल हो जाता है | ऐसा न करें | लेकिन गर्मी लगने पर अचानक खुले में कपडे न उतारें | पसीना आने से शरीर में पानी की कमी आती हैं और dehydration कि सम्भावना बढती है | ज्यादा ऊंचाई में साँस लेने में दिक्कत आती है और सिर में बहुत दर्द होता है | जिसका मुख्य कारण हवा में आक्सीजन कि कमी होता है | शरीर में पानी और हवा में आक्सीजन की कमी, ये दोनों स्थितियां ठीक नहीं हैं | अतः पानी और ग्लूकोस का प्रयाप्त सेवन करें | पहाडो पर पेट खराब हो जाना आम बात है | घर से निकलने से पहले हैजे का टीका लगवाने में कोई बुराई नहीं है |  तमाम उपायों के बाबजूद काफी समय तक स्वांस लेने में परेशानी हो, और चला भी न जाये तो फेफड़ों में पानी आने का भय रहता है, जिसे पलमोनरी एडीमा कहते हैं | ऐसे ट्रेकर को तुरंत नीचे ले आयें और डॉक्टर के हवाले कर दें | सिर में भी कुछ ऐसी ही तकलीफ का भय रहता है जिसे ब्रेन एडीमा कहते हैं | कई बार उल्टी करने का मन करता है परन्तु उल्टी नहीं आती |

      पहाडों में असाबधानी कि कोई गुंजाइश नहीं रहती | एक त्रुटि का अर्थ है दुर्घटना |  दुस्साहस भयानक भूल होती है | इसके अलावा नशीले पदार्थों का सेवेन नहीं करना चाहिए | एक निश्चित पड़ाव पर पहुँच कर कैंप लगाना होता है | जरुरी है यह काम अँधेरा होने से पहले ही कर लिया जाए | टेंट लगा कर और भोजन कि व्यवस्था करके आसपास के ऊँचे क्षेत्रों पर चढ कर कुछ समय विताना चाहिए | जब आप नीचे उतर कर कैंप में आते हैं तो ऊंचाई का असर बहुत कम हो जाता है | भूंख भी लगती है और नींद भी अच्छी आती है |

      कैंप लगाने के लिए सुरक्षित स्थान ढूँढना अनुभव कि बात है | स्थान ऐसा हो जहां हवा कम से कम लगती हो, पानी पास ही होना चाहिए | यह स्थान भू-स्खलन क्षेत्र में न हो | टेंटों में धूम्रपान करना, मोमबत्ती जलना, अगरबती आदि नहीं जलाना चाहिए | ट्रेकिंग के दौरान प्राकृतिक व अप्राकृतिक दोनों प्रकार के खतरों से बचना चाहिए | नदी के सूखे किनारों को सुरक्षित समझकर वहाँ कभी कैंप न लगाएं | पर्वत के ऊपरी भागों में भारी बारिश से चंद मिनटों में बाढ़ आ जाती है, जो सब कुछ वहा कर ले जाती है | हिमखंडो से निकलने वाले नालों के पास रुकना भी खतरनाक है | पानी अपने साथ हमेशा रखना चाहिए | तारामंडल और कम्पास का ज्ञान हमेशा काम आता है |

परन्तु इन मुश्किलों के बाबजूद प्रकृति के पास रहने का अपना ही आनंद है, जो आपको शहरी जिंदगी में कभी भी नहीं मिल सकता | असली जिगर वाले ही ट्रेकिंग का एन्जॉय कर सकते हैं |

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Satopanth Lake (4,402m)

This triangular lake of serene waters has a perimeter of about half a kilmetre. It is about 25km from Badrinath. Brahma, Vishnu and Maheshwar, the Hindu trinity are believed to occupy one corner each, and which are named after them. The trek is hazardous, but the landscape is very dramatic. A guide is advisable. There is no place to rest in between, except caves. Cooked food, stove etc, have to be carried from Badrinath itself.

How To Reach Satopnath Lake
Total Distance
Delhi———————————- Satopnath Lake————— 557 kms.
Delhi———————————- Meerut ———————– 67 kms.
Meerut——————————– Roorkee———————– 116 kms.
Roorkee —————————— Haridwar———————- 31 kms.
Haridwar—————————— Rishikesh———————- 24 kms.
Rishikesh—————————— Deoprayag——————– 70 kms.
Deoprayag—————————- Srinagar———————– 38 kms.
Srinagar——————————- Rudraprayag—————— 34  kms.
Rudraprayag————————– Chomli———————— 62 kms.
Chomli——————————– Joshimath———————- 52 kms.
Joshimath—————————— Gobvid Dham—————– 19 kms.
Govind Dham————————- Badrinath———————- 25 kms.
Badrinath—————————— Mana————————– 03 kms.
Mana———————————- Satopnath Lake————— 16 kms.

Rail :- Nearest Railhead is  Rishikesh.

Air :- Nearest Airport is Jolly Grant at Dehradun.

Best time: July To September.

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Nanda Devi Glacier

The Nanda Devi North and Nanda Devi South two noteworthy glaciers of Uttaranchal Himalayas reguion are both approximately 19 km in lentrh. These glacers stem form lthe southern slope of Nanda Devi peak. Therse well developed glacier can be accessed foem Lata and Joshimath which is the last roadhead. The trek to the glaciers onme of the most treacherous in Uttarachal measers through alpine neadows naooriw gorges steep Mounation slopes and sometimes through patches of snow.

River Basin : Rishi Ganga

Originates from : Southem slope of Nanda Devi Peak (7108m)

Length : 19 kms.

Approachable from : Joshimath on the way Malari Road  through Lata.

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Location:On the way to Gangotri,at a distance of 73 Kms. from Uttarkashi,this sleepy hamlet offers immaculate beauty of the Himalayas,at an impressive height of 2,620 mtrs. above the sea level.

Harsil is still a sleeping beauty, unexplored by the travellers. It has unlimited beauty in the form of green valleys and sleepy meadows,surrounded by the breathtaking splendour of the Himalayan peaks.Harsil is a cantonment area. So it is restricted for the foreign tourist. Apart from being at the way to Gangotri, it’s also the entry point to

Kinnaur Himalayas in the Himachal Pradesh. One can walk through the pristine valleys,tall trees,encircling lakes and go for long treks

How to Reach

By Air: The nearest airport is at Jolly Grant in Dehradun, which is 235 km from Harsil

By Rail: The nearest railway station is Rishikesh,at a distance of 218 Kms. from Harsil

By Road: Harsil is 73 kms. from Uttarkashi on the way to Gangotri.

General Information
Altitude: 7,860 ft.
Weather: Pleasant summer, heavy rainfall, snowfall in winter.
Language: Garhwali, Himachali, Hindi

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Sahastra Tal (4135m)

The Sahastra Tal and the Masar Tal lie to the west and east of the Khatling glacier, a lateral glacier at the source of river Bhilangana.

The Valley of Bhilangana affords a panosramic view of snow-capped peaks and hanging glaciers such as Jogin group, Kirti Stambh and Meru, which are maginificent to say the least. The trek route passes through lush and verdant forests and green meadows, which during the monsoons come alive with flowers in full bloon. Trekkers have to also cross scores of small streams onf improvised log-bridges.
How To Reach Sahaasta Tal
Total Distance
Delhi———————————- Shastra Tal——————– 379 kms.
Delhi———————————- Roorkee———————– 183 kms.
Roorkee——————————- Rishikesh———————- 55 kms.
Rishikesh —————————– Chamba———————– 62 kms.
Chamba —————————— Tehri————————– 12 kms.
Tehri———————————- Ghuttu————————- 53 kms.
Ghuttu ——————————– Shastra Tall——————– 10 kms.


Rail :- Nearest Railhead  is  Rishikesh.

Air :- Nearest Airport is Jolly Grant at Dehradun.

Best time: June to October

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Milam Glacier

Milam at 3,450 meters is populary the largest glacier in the kumaon region and liew in the easternm region of Kumaon . It is sityuated on the  south facing slope of the main Himalayas rage is 16 km long and originages form the slope of Kholi and Trushual [eaks it if s\fed by the Nanda Devi on the west and the panchuli and Kalababdar glaciers form the east and is the soure for the Milam river snd tirbyrary of lthe Pindar river.

The Jounary involves a bout 10 days of rrekking between 4-7 houres each day . The best season is May –June and spetmber –October.

How To Reach Milam   Glacier


Total Distance

Delhi———————————- Milam Glacier —————– 705 kms.

Delhi———————————- Moradabad——————- 145 kms.

Moradabad————————— Bareily———————— 96 kms.

Bariely——————————– Tanakpur———————- 135 kms.

Tankupr——————————- Champawat——————- 76 kms.

Champawat————————— Ghat————————— 45 kms.

Ghat———————————– Pithoragrah——————– 29 kms.

Pithoragrah—————————- Munsyari———————- 121 kms.

Munsyari—————————— Milam Glacier—————– 58 kms.

Rail :- Nearest Railhead Tanakpur.

Air :- Pithoragarh has an Airstrip At Naini Sani.

Base Camp Munsyari
Munsyari to Lilam——————— 12 kms.

Liam to Bog Udiyar——————- 13 kms.

Bagudyar to Railkot——————- 12 kms.

Martoli to Burfu———————– 09 kms.

Mialm to Milam Village ————— 08 kms.

Millam Vullage to Glacier————– 05 kms.

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Roop Kund (The mystery lake)

Roopkund Lake, at around 5,000 meters, offers one of the most spectacular trekking routes with its stunning views of Trishul. It is also famous for the mystery surrounding it. This shallow lake still has the skeletal remains of some 300 people who perished swome 600 years ago in an unrecorded disaster. Trekkers have found human bones on the shore of the lake confirming this tragedy. Some belive them to be the remains of General Zorawar’s soldiers who perished here in a vain attempt to conquer Tibet while others maintain that they are the skeletons of zealous pilgrims undertaking the Raj jat, an important pilgrimage. to pay homage to Nanda Devi.
Roop Kund is situated in the eastem part of Chamoli District (in the lap of the Trishul)

How To Reach Roop Kund
Total Distance
Delhi———————————- Roopkund——————— 474 kms.
Delhi———————————- Moradabad——————- 145 kms.
Moradabad————————— Rampur Doraha————— 07 kms.
Rampur Doraha———————– Kashipur———————- 33 kms.
Kashipur—————————— Ramnagar——————— 28 kms.
Ramnagar—————————– Ranikhet———————– 95 kms.
Ranikhet——————————- Kausani———————– 55 kms
Kausani——————————- Baijnath———————– 17 kms.
Baijnath——————————- Gwaldam———————- 24 kms.
Gwaldeam—————————– Lohahang Pass—————- 27 kms.
Lohajang pass————————- Roopkund——————— 43 kms.


Best Time: July to mid October

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This lateral glacier situated in Tehri District is the sourceof river Bhilanga> the glacier is surrounded by the snow peaks of the hogin group (6466)sphetic pristwar (6905m)Barkte kauter (6579) krti stambh (6902m) and Mery. The pristwar morainses on the side of the glaciers look like standing walls of gravel mud.

The entry to the Bhilabgana Valley provides excellent sports for camping . Tents and adequaters proviside  need to be arranged inadvance from Rishikesh , Tehri or Dehradun.

How To Reach Khatling  Glacier


Total Distance

Delhi———————————- Khatling Glacher ————– 452 kms.

Delhi———————————- Roorkee———————– 183 kms.

Roorkee——————————- Rishikesh———————- 55 kms.

Rishikesh—————————— Chamba———————– 62 kms.

Chamba——————————- Galdoil———————— 53 kms.

Gadolia——————————– Ghuttu————————- 47 kms.

Ghuttu——————————— Khaling———————— 52 kms.

Rail :- Nearest Railhead  is  Rishikesh.

Air :- Nearest Airport is Jolly Grant at Dehradun

Base Camp Guttu

Guttu toReeh————————– 10 kms.

Reeh to Gangi————————- 10 kms.

Gangi to kalyani———————– 05 kms.

Kalyani to Bhalbagi——————– 13 kms.

Bhelbagi to Khatling——————- 07 kms.

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